
अलीगंज सेक्टर डी के भूखंड संख्या एमएस 102 पर बने अवैध भवन में जून को लगी भीषण आग
जागरण संवाददाता, लखनऊ। राजधानी में 22 जून को अलीगंज सेक्टर डी में अवैध बिल्डिंग में लगी भीषण आग की जांच कर रही एसआइटी ने नौ आईएएस व नौ पीसीएस अधिकारियों पर कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
सभी अधिकारी लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में तैनात रहे हैं। इनमें से कुछ जिलाधिकारी के पद पर, कुछ एलडीए में ही तैनात है, वहीं दो अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती पर एसआइटी रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और जल्द ही शासन को सौंपी जाएगी। पहली बार आइएएस व पीसीएस अधिकारियों की भूमिका की जांच हो रही है। माना जा रहा है कि नियुक्ति विभाग संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब-तलब कर सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती पर एसआईटी रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और जल्द ही शासन को सौंपी जाएगी। माना जा रहा है कि इसके बाद नियुक्ति विभाग संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब-तलब कर सकता है। इस घटना में 15 लोगों की मौत हुई थी और नौ लोग झुलसे थे।
इसी कारण एलडीए ने सौ से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम एसआईटी को भेजे हैं। आईएएस अधिकारियों में लखनऊ के मौजूदा नगर आयुक्त गौरव कुमार, तत्कालीन एलडीए उपाध्यक्ष मैनपुरी के जिलाधिकारी इंद्रमणि त्रिपाठी और तत्कालीन एलडीए सचिव अमेठी के जिलाधिकारी पवन गंगवार, सत्येंद्र यादव, शिवाकांत द्विवेदी, अक्षय त्रिपाठी, एमपी सिंह, ऋतु सुहास और श्रीश चंद्र वर्मा हैं।
इनके साथ ही पीसीएस अधिकारी में अमित राठौर, विपिन शिवहरे, श्रद्धा चौधरी, प्रिया सिंह, संगीता राघव, प्रभाकर सिंह, डीके सिंह, विश्व भूषण मिश्र और सुशील प्रताप सिंह अलग-अलग पदों पर तैनात रहे।
इनमें कई अफसर इस समय भी एलडीए में तैनात हैं। इंजीनियरिंग विभाग से 14 अधिशासी अभियंता व सहायक अभियंता और 52 अवर अभियंताओं की सूची भेजी गई है। सूत्र बताते हैं कि एसआइटी की जांच रिपोर्ट में इनमें से अधिकांश पर कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है। अब नियुक्ति विभाग जल्द ही आरोपितों को नोटिस जारी करके जवाब तलब करेगा, क्योंकि एसआइटी की रिपोर्ट जल्द ही शासन को सौंपी जाएगी।
सात दिन में देनी थी रिपोर्ट, 15 दिन में नहीं सौंपी
अलीगंज सेक्टर डी के भूखंड संख्या एमएस 102 पर बने अवैध भवन में गेमिंग जोन व अन्य दफ्तर चल रहे थे। घटना के बाद शासन ने इस मामले की एसआइटी जांच के लिए अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन प्रवीण कुमार को जिम्मेदारी सौंपी और सात दिन में रिपोर्ट मांगा था।
इस मामले में आरोपित भवन स्वामी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ल व तीन अन्य को जेल भेजा गया था, जबकि सुरेंद्र प्रसाद शुक्ल अभी फरार है और उस पर पचास हजार रुपया का इनाम घोषित किया गया है। 24 व 25 जून को एसआईटी टीम ने दो बार घटना स्थल का निरीक्षण किया।
इसके बाद 26 जून को आरोपित भवन स्वामी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ल को नोटिस तामील की गई। इस मामले में शासन ने चार इंजीनियरों व एक सुपरवाइजर को निलंबित कर दिया। 27 जून को एसआइटी ने अधिकांश गवाहों व संबंधित अधिकारियों के बयान पूरे किए।
अलीगंज की इमारत पुलिस अभिरक्षा में सौंपकर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई। तीन जुलाई को एसआइटी की जांच पूरी हो गई है, सात दिन से जांच रिपोर्ट शासन को सौंपने का इंतजार किया जा रहा है। उधर, विहित न्यायालय में अवैध भवन की सुनवाई सात जुलाई से चल रही है। यह पूरा होते ही भवन ढहाने की प्रक्रिया तेज होगी।