रेड फोर्ट ब्लास्ट केस को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकी डॉक्टर्स का ग्रुप कथित तौर पर यहूदी के एक ग्लोबल कॉफी चेन के आउटलेट्स पर हमला करने की साजिश रच रहा था।
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फरीदाबाद: दिल्ली के लाल किले पर हुए सुसाइड अटैक को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। ‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुसाइड अटैक के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों का ग्रुप कथित तौर पर यहूदी के एक ग्लोबल कॉफी चेन के आउटलेट्स पर हमला करने की साजिश रच रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल ’ पिछले चार सालों से एक्टिव था।
इजरायल को देना चाहते थे बड़ा मैसेज
रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के आरोपी डॉक्टर्स मुजम्मिल अहमद गनई, अदील अहमद राथर और उत्तर प्रदेश के शाहीन सईद ने जांचकर्ताओं को बताया कि आतंकी हमले के टारगेट चुनने को लेकर उनका आपस में मतभेद था। इन तीनों डॉक्टर्स का प्लान था कि दिल्ली समेत दूसरे बड़े शहरों में कॉफी चेन आउटलेट्स पर हमला करके इजरायल की गाजा में मिलिट्री कार्रवाई के खिलाफ दुनिया भर में एक मैसेज दिया जाए। इन डॉक्टर्स की राय लाल किला सुसाइड ब्लॉस्ट में मारे गए आतंकी उमर-उन-नबी से अलग थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ग्रुप के कुछ सदस्य आतंकी साजिश को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों को टारगेट करने तक ही सीमित रखना चाहते थे।
एजीयूएच को फिर से करना चाहते थे जिंदा
‘द हिंदू’ के मुताबिक, एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि यह ग्रुप ग्लोबल आतंकी संगठन अल-कायदा की भारतीय शाखा अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीयूएच) को फिर से जिंदा करना चाहता था। एजीयूएच की स्थापना जाकिर मूसा ने की थी, जो 2019 में साउथ कश्मीर के त्राल में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। आरोपी डॉक्टर्स एजीयूएच को फिर से जिंदा करना चाहते थे और देश में इस्लामिक कानून स्थापित करना चाहते थे। आतंकी संगठन एजीयूएच का आखिरी जाना-माना कमांडर मुजम्मिल अहमद तांत्रे भी 2021 में एक मुठभेड़ में मारा गया था।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 20 दिन तक की थी जांच
लाल किले में कार धमाके से पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दो आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और एजीयूएच से जुड़े एक ‘टेरर मॉड्यूल’ का पता लगाने के लिए 20 दिन तक जांच की थी। यह जांच 19 अक्टूबर, 2025 को श्रीनगर में एक जैश-ए-मोहम्मद के पैम्फलेट मिलने के बाद शुरू हुई थी। इस पोस्टर में स्थानीय लोगों से पुलिस के साथ सहयोग न करने और उन्हें अपनी दुकानों में घुसने से मना करने के लिए कहा गया था। इस पोस्टर की वजह से जम्मू-कश्मीर पुलिस शोपियां में एक मौलवी तक पहुंची थी। इसी जांच के सिलसिले में 9 और 10 नवंबर को फरीदाबाद में छापे के दौरान कथित आतंकी साजिश का खुलासा हुआ था। पुलिस को घर से 2,900 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थ और आधुनिक हथियार बरामद हुए थे।
केमिकल्स मिलाकर किए थे कई एक्सपेरिमेंट
आरोपी डॉक्टर्स ने कई ऑनलाइन वीडियो देखे और शुरू से बम बनाने का इरादा किया था। इसीलिए उनसे हजारों किलो यूरिया के बैग बरामद किए गए। उन्होंने कई केमिकल्स मिलाकर बहुत सारे एक्सपेरिमेंट किए थे, ताकि यह पक्का हो सके कि बम लोकल लेवल पर मिलने वाले सामान से बनाए जाएं, जिससे कोई शक न हो।
जल्दबाजी में किया गया था आतंकी हमला
रिपोर्ट के मुताबिक, एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि आतंकी नबी ने शायद जल्दबाजी में कार में करीब 40 किलो विस्फोटक इकट्ठा किया था और दिल्ली में बम धमाके की घटना को अंजाम दिया था। यह बम धमाका शायद उसके ग्रुप के दूसरे सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद जल्दबाजी में किया गया था। इससे पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकी उमर-उन-नबी के फोन से 1.20 मिनट का एक वीडियो क्लिप बरामद किया था, जिसमें वह सुसाइड बॉम्बिंग के बारे में बात करते हुए दिख रहा था। पुलवामा में उसके घर के पास एक गड्ढे में फेंके गए उसके फोन से बरामद वीडियो क्लिप में भी वह शहादत ऑपरेशन्स के बारे में बात करते हुए दिख रहा था।